आओ रचे इतिहास..

आओ कुछ नया रचते है इतिहास में हम भी
इस औकात को पार कर मंजिल तक जाएंगे
हो खड़े कदम से कदम मिलाकर अब तुम भी
कर्तव्य,दृढ़ निश्यच से हम भी लक्ष्य तक जाएंगे

आने दो जो भी तूफान आते है राहों में हमारे
परास्त अपनी क्षमता से हम भी कर जाएंगे
अब बैठेंगे नही, लड़ते रहेंगे अंतिम क्षण तक
मेहनत की कोशिशों से हम इनसे लड़ जाएंगे

हम अब ना हार मानेगे, ना आशा को त्यागेंगे
मन मे विश्वास,धीरज रख हम सफल हो जाएंगे
चाहे धीरे चलकर,स्थिर चलकर,धैर्य रखकर
एक दिन मंजिल पर हम जरूर पहुच जाएंगे

हिम्मतों से हार गए तो पूछेगा कोंन तुम्हे यहा
बस रख हिम्मत हम खुद को भी वार जाएंगे
डर को भी जड़ से खत्म कर अब,शौर्य पूर्वक
हम प्रयत्नों की शक्ति से सफलता तक जाएंगे

आओ कुछ नया रचते है इतिहास में हम भी
इस औकात को पार कर मंजिल तक जाएंगे..

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बचपन के दोस्त..

हमारी मस्तिया देख महफ़िल भी शर्माती थी
फिर चुप कर बैठ जाना अब अच्छा नही लगता

और पहले महफ़िल भी बेवजह जमा लेते थे
अब वजह से महफ़िल भी ना जमना अच्छा नही लगता

झूठे वादों से , सच को संवार कभी लेते थे हम
अब सच्चे वादों को करना भी अच्छा नही लगता

रोज की गुस्ताखी तो हमारी हरकते करती थी
शांत अकेले में रहना अब अच्छा नही लगता

हमारी पढ़ाई भी तो कभी मस्ती में रहती थी
अब इन किताबो का जाल हमे अच्छा नही लगता

बस वो खेल दफन से हो गए है चिता में कही
गली में घुट घुट के जीना अब उन्हें अच्छा नही लगता

वो दिन कभी जब हमसे निकलना सीखते थे
जमानो में मिलना अब हमें अच्छा नही लगता

मचल जाते है पुराने किस्से हमारी यादों के कभी
यादों में यू रोज मिलना अब अच्छा नही लगता

ख्वाइश है खुदा से ,की वो दिन वापस ले आये
दूर दूर तुमसे रहकर, फिर अब अच्छा नही लगता

पैगाम..

कल लम्बे अरसे बाद फिर उसका पैगाम आया 

लिखा था छोड़ो सब बातें फिर मोहब्बत करते है

मेने भी फिर आज यह पैगाम भेज दिया उसको

की आओ तुम जल्दी फिर से हम दीवानी करते है ,

राते…

इस चांद में कभी मायूसी भी नज़र आती है

अमावस की रात यह महसूस हमे कराती है

 इन तारो में कुछ सितारे भी है दोस्त शायद 

यह राते हमे हर रोज यही एहसास कराती है

नज़रे..

नज़रे जब हमारी तुमसे लड़ने लगी .

कसम से ये इश्क़ फिर जवां हो गया 

हर वक्त ये आंखे इंतज़ार करने लगी

 शायद यह प्यार फिर से बयां हो गया …

घर से दूर …

मेरी किताब में भी है कुछ शब्द वह ऐसे , जो घर से दूर रहकर में इसमे व्यक्त करता हु ।

..

जितनी भी कीमत हो, में देने को तैयार हू, 

बस दुनिया के इस बाजार में , काश मेरे जैसा कोई मिल जाये..

मेरी यादें..

में , मेरी कलम , और मेरी डायरी ,
इस किनारे को हर रोज याद करती है ..

कभी हम बैठे थे यहां नज्मे लिखने 

मेरी तवज्जो भी इसी को प्यार करती है..

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