पैगाम..

कल लम्बे अरसे बाद फिर उसका पैगाम आया 

लिखा था छोड़ो सब बातें फिर मोहब्बत करते है

मेने भी फिर आज यह पैगाम भेज दिया उसको

की आओ तुम जल्दी फिर से हम दीवानी करते है ,

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राते…

इस चांद में कभी मायूसी भी नज़र आती है

अमावस की रात यह महसूस हमे कराती है

 इन तारो में कुछ सितारे भी है दोस्त शायद 

यह राते हमे हर रोज यही एहसास कराती है

नज़रे..

नज़रे जब हमारी तुमसे लड़ने लगी .

कसम से ये इश्क़ फिर जवां हो गया 

हर वक्त ये आंखे इंतज़ार करने लगी

 शायद यह प्यार फिर से बयां हो गया …

घर से दूर …

मेरी किताब में भी है कुछ शब्द वह ऐसे , जो घर से दूर रहकर में इसमे व्यक्त करता हु ।

..

जितनी भी कीमत हो, में देने को तैयार हू, 

बस दुनिया के इस बाजार में , काश मेरे जैसा कोई मिल जाये..

मेरी यादें..

में , मेरी कलम , और मेरी डायरी ,
इस किनारे को हर रोज याद करती है ..

कभी हम बैठे थे यहां नज्मे लिखने 

मेरी तवज्जो भी इसी को प्यार करती है..

कलमकार 

जिस दिन मेरे शब्द चलते है , 

उस दिन मेरी कलम रुक जाती है 

कलम , शब्द अगर एक साथ चल दे

तो शायद कलमकार हो जाऊं ।

Home Calling

calling home is such a feeling that the mind gets the biggest indiscretion of life.

It was just a little while ago talking to the house at that time, Dad said, son, you are missing a lot or can you come ?
At that time, I realized that my heart’s desire has been fulfilled. My mind was very pleased
I said to Dad, Yes, I will come in Dad
Today that day has come and today I am going home and all the members of the house were missing a lot.
Our home is a place where we can not even know when our time is being fulfilled. The love that comes home gives a lot of satisfaction to the mind. I am very excited today that I will meet my family and spend my time with them.

Love u home !!

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